पाशुपतास्त्र-मंत्र भगवान शिव से संबंधित एक शक्तिशाली मंत्र है। इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की बाधाओं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह मंत्र भगवान शिव के पाशुपतास्त्र स्वरूप को समर्पित है। इस मंत्र का जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सफलता मिलती है।
पाशुपतास्त्र-मंत्र:
“ॐ श्रीं पशुपतिः हुं फट्।”
इसके अतिरिक्त, पाशुपतास्त्र स्तोत्र भी है जिसका पाठ किया जाता है।
पाशुपतास्त्र स्तोत्र:
“ॐ नमो भगवते महापाशुपतायातुलबलवीर्यपराक्रमाय त्रिपन्चनयनाय नानारुपाय नानाप्रहरणोद्यताय सर्वांगडरक्ताय भिन्नांजनचयप्रख्याय श्मशान वेतालप्रियाय सर्वविघ्ननिकृन्तन रताय सर्वसिध्दिप्रदाय भक्तानुकम्पिने असंख्यवक्त्रभुजपादाय तस्मिन् सिध्दाय वेतालवित्रासिने शाकिनीक्षोभ जनकाय व्याधिनिग्रहकारिणे पापभन्जनाय सूर्यसोमाग्नित्राय विष्णु कवचाय खडगवज्रहस्ताय यमदण्डवरुणपाशाय रूद्रशूलाय ज्वलज्जिह्राय सर्वरोगविद्रावणाय ग्रहनिग्रहकारिणे दुष्टनागक्षय कारिणे”
यह स्तोत्र अग्नि पुराण के 322वें अध्याय से लिया गया है. इसका नित्य पाठ करने से कई लाभ होते हैं, जैसे: कष्टों और शत्रुओं पर विजय, भौतिक सुखों की प्राप्ति, भगवान शिव की कृपा, शनिदेव की प्रसन्नता, विघ्नों से मुक्ति.
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