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राम रक्षा स्तोत्र क्या है, इसकी रचना किसने की और क्या हैं इसके नित्य पाठ के लाभ?
राम रक्षा स्तोत्र आनंद रामायण से लिया गया है।इसे सर्वप्रथम भगवान शिव ने बुधकौशिक ऋषि को स्वप्न में उपदेश किया था तथा सुबह जागने के बाद ऋषि ने इसे संस्कृत भाषा में लिपिबद्ध किया था। बुधकौशिक ऋषि विश्वामित्र का नाम है।

एक बार कंठस्थ होने के बाद राम रक्षा स्तोत्र अपना पूर्ण प्रभाव दिखने में सक्षम होता है

इसके निम्नलिखित लाभ व महत्व आनंद रामायण में प्राप्त होते हैं जो इस प्रकार है।।।।।

1) राम रक्षा स्तोत्र ‘सर्वकामदाम्’ है अर्थात् सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला है।

2) इसके नित्य पाठ से पाठक चिरायु हो जाता है

3) इसके नित्य पाठ करने से सुख समृद्धि और वंश परंपरा अविरल रूप से चलती रहती है

4) इसके पाठ करने वाले को सुख समृद्धि प्राप्त होती है परंतु उसके साथ घमंड नहीं आता सरलता बढ़ती जाती है।

5) इसके नित्य पाठ करने से अत्यधिक क्रोध आना शांत हो जाता है पाठक विनयी हो जाता है।

6) जो राम रक्षा स्तोत्र का नित्य पाठ करते हैं उन्हें पाताल में भूतल पर या आसमान में विचरण करने वाली कोई भी शक्तियां देखने तक में भी समर्थ नहीं होती अथार्त् उनके पास फटक तक नहीं सकती।

7) जिसने एक बार राम रक्षा स्तोत्र की शरण ले ली वह जिस जिस सिद्धि की कामना करता है उसे वह वह सिद्धियां सहजता से प्राप्त हो जाती है।

8) राम रक्षा स्तोत्र के नित्य पाठ करने वाले की सभी आपदाएं अपने आप टल जाती हैं।

9) रामरक्षा स्तोत्र का नियमित एक पाठ करने से शरीर रक्षा होती है। मंगल का कुप्रभाव समाप्त होता है। रामरक्षा स्तोत्र के प्रभाव से व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बन जाता है जिससे हर प्रकार की विपत्ति से रक्षा होती है।

10) यदि गर्भवती स्त्री रोजाना इस स्तोत्र का पाठ करे तो इसके शुभ प्रभाव से गर्भ रक्षा होती है। स्वस्थ, सौभाग्यशाली एवं आज्ञाकारी संतान प्राप्त होती है। रामरक्षा स्तोत्र पाठ से भगवान राम के साथ पवनपुत्र हनुमान भी प्रसन्न होते हैं।