AstroShaliini
Your Vedic Astrologer, Crystal healer Numerologist,
Reiki dowsing, aura reader, vastu,signature analysist
बजरंग बाण
यंत्र मंत्र तंत्र, कालीविद्या का समूल विनाशक,सविधि प्रामाणिक बजरंग बाण श्रीरामः शरणं मम बजरंग बाण बजरंग बाण का पाठ रात्रि ११ बजे से गूगल की धूप देते हुए करें | और ११ से २ के बीच जिस फल की इच्छा से पाठ किया जाय वह फल अवश्य प्राप्त होगा | किन्तु यदि किसी ब्राह्मण या...
मघा नक्षत्र का जल ।।
।। मघा नक्षत्र का जल ।।वर्षाऋतु में अभी मघा नक्षत्र चल रहा है । मघा नक्षत्र की वर्षा अमृत के समान है । इस समय आकाश बिल्कुल स्वच्छ हो जाता है अतः जो जल बादलों से गिरता है वह भी स्वच्छ और निर्मल रहता है । मुझे अच्छे से याद है बचपन में दादी वर्षा होने पर एक बड़ा तपेला...
सोमवार के दिन श्रृंगी से करें शिवलिंग का जलाभिषेक
सोमवार के दिन श्रृंगी से करें शिवलिंग का जलाभिषेक🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, रुद्राभिषेक आदि कई प्रकार से अभिषेक करते हैं इसमें जलाभिषेक सबसे महत्वपूर्ण होता है। लेकिन जलाभिषेक यदि श्रृंगी से किया जाए तो यह बहुत ही शुभ...
हनुमानजी का मंत्र जपने का क्या है प्रभाव,
हनुमानजी का मंत्र जपने का क्या है प्रभाव, परिणाम और महत्व🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹हनुमानजी के बहुत सारे मंत्र हैं। वैदिक मंत्र, पौराणिक मंत्र, साबर मंत्र और तांत्रिक मंत्र। सभी को जपने का तरीका और सभी के प्रभाव अलग-अलग है। गृहस्थ लोगों को उनके मूल मंत्र का ही जप करना चाहिए। कहते...
बेलपत्र की कहानी :-
बेलपत्र की कहानी :- स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती के पसीने की बूंद मंदराचल पर्वत पर गिर गई और उससे बेल का पेड़ निकल आया। चुंकि माता पार्वती के पसीने से बेल के पेड़ का उद्भव हुआ। अत: इसमें माता पार्वती के सभी रूप बसते हैं। वे पेड़ की जड़ में गिरिजा के स्वरूप...
बेलपत्र की कहानी :-
स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती के पसीने की बूंद मंदराचल पर्वत पर गिर गई और उससे बेल का पेड़ निकल आया। चुंकि माता पार्वती के पसीने से बेल के पेड़ का उद्भव हुआ। अत: इसमें माता पार्वती के सभी रूप बसते हैं। वे पेड़ की जड़ में गिरिजा के स्वरूप में, इसके तनों में माहेश्वरी के स्वरूप में और शाखाओं में दक्षिणायनी व पत्तियों में पार्वती के रूप में रहती हैं
फलों में कात्यायनी स्वरूप व फूलों में गौरी स्वरूप निवास करता है। इस सभी रूपों के अलावा, मां लक्ष्मी का रूप समस्त वृक्ष में निवास करता है।
बेलपत्र में माता पार्वती का प्रतिबिंब होने के कारण इसे भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है। भगवान शिव पर बेल पत्र चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं।
जो व्यक्ति किसी तीर्थस्थान पर नहीं जा सकता है अगर वह श्रावण मास में बिल्व के पेड़ के मूल भाग की पूजा करके उसमें जल अर्पित करे तो उसे सभी तीर्थों के दर्शन का पुण्य मिलता है।
बेल वृक्ष का महत्व-
1. बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते।
2. अगर किसी की शवयात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है।
3. वायुमंडल में व्याप्त अशुद्धियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है।
4. 4, 5, 6 या 7 पत्तों वाले बिल्व पत्रक पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है।
5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है और बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
6. सुबह-शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है।
7. बेल वृक्ष को सींचने से पितर तृप्त होते हैं।
8. बेल वृक्ष और सफेद आक को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
9. बेलपत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे।
10. जीवन में सिर्फ 1 बार और वह भी यदि भूल से भी शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ा दिया हो तो भी उसके सारे पाप मुक्त हो जाते हैं।
11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्द्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाएं। बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं
Subscribe & Follow
Join Our Newsletter
अधिक जानकारी के लिए तथा समय – समय पर अनेक प्रकार की पूजा , मंत्र तथा पूजन विधि जांनने के लिए हमारे साथ जुड़े।
Recent Comments