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वार वेला, काल वेला, काल रात्रि क्या हैं?

वार वेला, काल वेला, और काल रात्रि हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में समय और जीवन के गहरे सिद्धांतों को दर्शाते हैं। ये विशेष समय और अवधियों से जुड़े हुए हैं, जो एक व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। आइए इन्हें क्रमवार समझते हैं:1. वार वेला:• अर्थ: वार वेला का मतलब है दिन का समय, जब किसी विशेष दिन के ग्रह का विशेष प्रभाव होता है। वार वेला हर दिन के एक विशिष्ट समय को संदर्भित करता है, जो उस दिन के ग्रह से जुड़ा होता है। उदाहरण के लिए, रविवार को सूर्य का दिन माना जाता है, और वार वेला उस समय को दर्शाती है जब सूर्य का प्रभाव सबसे अधिक होता है।• उपयोग: ज्योतिष में वार वेला को महत्वपूर्ण निर्णय लेने, पूजा-पाठ या किसी विशेष कार्य की शुरुआत के लिए शुभ या अशुभ माना जाता है। इस समय का ध्यान रखकर शुभ कार्यों को करने से अच्छे परिणाम मिलते हैं।2. काल वेला:• अर्थ: काल वेला से तात्पर्य उस विशेष समय से है, जब मृत्यु या नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव सबसे अधिक होता है। यह समय गंभीर और भारी होता है, और इसे जीवन के अंतिम चरण या किसी बड़े संकट से जोड़ा जाता है।• उपयोग: काल वेला को नकारात्मक समय माना जाता है, जिसमें कोई शुभ कार्य करने की मनाही होती है। ज्योतिष में इस समय का उपयोग व्यक्ति की कुंडली में अशुभ घटनाओं या कठिनाइयों का पूर्वानुमान लगाने के लिए किया जाता है।3. काल रात्रि:• अर्थ: काल रात्रि से तात्पर्य विनाश और परिवर्तन की रात से है। यह देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक का नाम भी है, जो अत्यंत शक्तिशाली और रौद्र रूप में मानी जाती हैं। काल रात्रि का अर्थ जीवन के उस समय से है, जब व्यक्ति किसी संकट, कठिनाई या मृत्यु के निकट होता है।• उपयोग: काल रात्रि का ज्योतिषीय और धार्मिक दोनों महत्व है। देवी कालरात्रि का पूजन नवरात्रि में विशेष रूप से किया जाता है। यह समय भय, अशुभ शक्तियों और संकटों से निपटने के लिए उपयुक्त माना जाता है।वार वेला सकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों के प्रभाव से जुड़े समय को दर्शाती है, जबकि काल वेला और काल रात्रि अधिक गंभीर और नकारात्मक शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन अवधियों का सही तरीके से पालन करने और समझने से व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली सकारात्मक और नकारात्मक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकता है और उनके अनुसार कार्य कर सकता है।

दिनमान को आठ भाग और रात्रिमान को आठ भाग करने से , हर एक भाग को ” चौघड़िया ” , जिसे बंगाली मे ” यामार्द्ध ” कहा जाता है । इस चोघड़िया के हिसाब से ही बार वेला , काल वेला और काल रात्रि का समय निकाला जाता है । रविवार ते चौथा और पांचवा , सोमवार को सातवां और दुसरा , मंगल को दुसरा और छठा , बुध को पांचवा और तीसरा , गुरु को अष्टम और सातवां , शुक्र को तीसरा और चतुर्थ , शनि को छठा , पहला और अष्टम चौघड़िया को यथाक्रम से बार वेला और कालवेला कहा जाता है । रात को रविवार को छठा , सोम को चोथा , मंगल को दुसरा , बुध को सातवां , गुरु को पांचवा , शुक्र को तीसरा , शनि को पहला और अष्टम चौघड़िया को काल रात्रि कहा जाता है । बार वेला , काल वेला और काल रात्रि को शुभ कार्य करना मना होता है ।