चन्द्र ग्रह-जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में चन्द्रमा अस्त हो जाता है तो उसके जीवन में अशान्ति बनी रहती है। मॉ रिश्ते अच्छे नहीं रहते है, माता का स्वास्थ खराब रहता है। यदि अस्त चन्द्रा अष्टम भाव या अष्टमेश के साथ हो तो व्यक्ति काफी समय तक अवसाद ग्रस्त रहता है। चन्द्रमा के अस्त होने पर विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न होते है जैसे-एनीमिया, फेफड़ों के रोग, मानसिक तनाव व अस्थमा आदि।
मंगल ग्रह-कुण्डली में मंगल के अस्त होने पर पराक्रम व साहस में कमी, क्रोध में वृद्धि, भाईयों से तनाव, भूमि व प्रापर्टी में विवाद, नसों में दर्द, दुर्घटना, मुकदमें बाजी, पत्नी को शारीरिक कष्ट व फोर्स से जुड़े लोगों को विशेष कष्टों को सामना करना पड़ता है। यदि मंगल षष्ठेश होकर पापी ग्रहों से दृष्ट है तो दुर्घटना व रोग की ज्यादा सम्भावना रहती है। अगर मंगल द्वादशेश होकर अस्त है तो व्यक्ति नशीले पदार्थो का सेंवन करने लग जाता है।
बुध ग्रह-बुध ग्रह अस्त होने से व्यक्ति में विश्वास की कमी, शरीर में ऐंठन, श्वास, चर्म रोग व गले आदि के रोग हो जाते है। जब बुध अस्त होता है तो युवाओं का दिमाग भ्रमित हो जाता है, उनका किसी काम में मन नहीं लगता है। बुध जब द्वादशेश के साथ सम्बन्ध बनाता है तो युवा नशे का आदी होकर अपना अधिकांश धन नशेबाजी में खर्च कर देता है।
बृहस्पति ग्रह-यदि आपकी कुण्डली में बृहस्पति की अन्तर्दशा चल रही है और बृहस्पति आपकी पत्री में अस्त होकर बैठा है तो विभिन्न प्रकार की समस्यायें उत्पन्न हो सकती है जैसे-लीवर का रोग, बच्चों का पढ़ाई में मन न लगना, टाइफाइड ज्वर, मधमेह, गुरू से विरोध, साइनस की समस्या, मुकदमों में फॅसना आदि। गुरू के अस्त होने से सन्तान उत्पन्न में बाधा आती है, बुर्जुगों को कष्ट होगा, शिक्षा मे रुकावट आती है ओर श्रद्वा में कमी आती है
शुक्र ग्रह-किसी भी कुण्डली में जब शुक्र ग्रह अस्त होता है तो स्त्रियों को गर्भाशय के रोग, नेत्र रोग, किडनी रोग, गुप्त रोग हावी रहते है। अस्त शुक्र जब राहु-केतु के प्रभाव में आता है तब जातक के मान-सम्मान में कमी आ जाती है। किसी के कारण कुछ लोगों को अपमान भी सहना पड़ सकता है। अस्त शुक्र षष्ठेश के साथ होता है तो किडनी, मू़त्राशय व यौनांगों के विकार उत्पन्न हो जाते है। शुक्र के अस्त होने पर विवाह में बाधायें भी आती है।
शनि ग्रह-जब किसी की पत्री में शनि ग्रह अस्त होकर बैठा होता है तो कमर दर्द,पैरो में दर्द, स्नायु तन्त्र के रोग आदि होते है। अस्त शनी । रोजागर में बाधायें, नौकरी में बॉस से तनाव, सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी, नशीले पदार्थो का आदी होना
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